foujibhanwarsingh.blogspot.com चुनावी बॉण्ड्स और सुप्रीम कोर्ट:-सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को 30 मई तक चुुनावी बांड से मिले चंदे की जानकारी चुनाव आयोग से साझा करने का निर्देश दिया था, लेकिन चुनावी बोंड पर रोक लगाने से इंकार किया था। चुनावी बोंड पर रोक लगाने की मांग एक गैर- लाभकारी संगठन ASSOCIATION FOR DEMOCRATIC REFORMS ने चुनावी बांड पर रोक लगाने की मांग की थी । राजनीतिक दलों पर गुमनाम तरीके से चुनावी चंदा लेने का आरोप लगाया गया था ।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई करते हुए 12 अप्रैल 2019 को फैसला सुनाया था । चुनावी बांड क्या है ? :- यह एक प्रोमिसरी नोट के रूप में ऋण सुरक्षा है, जिस पर किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं दिया जाता है। 2017 18 के बजट में सरकार ने चुनावी बांड योजना की घोषणा की थी और 2 जनवरी 2018 से योजना लागू हुई । चुनावी बांड की खरीद ऐसे व्यक्ति द्वारा की जा सकती है जो भारत का नागरिक हो या भारत में निगमित या स्थापित हो। व्यक्ति विशेष के रूप में कोई भी व्यक्ति एकल रूप से या अन्य व्यक्तिय...
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