ग़लतियाँ भी होंगी, राहें भी रुकेंगी,
कभी ज़िंदगी भी यूँ ही झुकेगी।
पर जो मुस्कुरा के चलता है,
वो ही तूफ़ानों से टकराता है।
दार्शनिक कहे — 'सब बिगड़ेगा मेरे प्यारे यार',
पर हौसला बोले — 'मैं हूँ तैयार!'
जो गिरकर भी फिर से खड़ा होता है,
वही जीत का असली हक़दार होता है।"
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